चीनी से बनेगा बायो प्लास्टिक, देश का पहला संयंत्र स्थापित

 - इंदौर आया 'बायो युग ऑन द व्हील्स', सेमिनार संपन्न
इंदौर मप्र। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के 'मेक इन इंडिया' विजन को साकार करते हुए, बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड ने देश का पहला बायोप्लास्टिक (पॉलीलैक्टिक एसिड-पीएलए) प्लांट स्थापित किया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई क्रांति लाएगा।



शुक्रवार को इंदौर में 'बायो युग ऑन द व्हील्स' कार्यक्रम में इस बायोप्लास्टिक से बने उत्पादों को देखने का अवसर मिला। प्लास्टिक एवं पैकेजिंग उद्योगों की संस्था इंडियन प्लास्ट पैक फोरम और बलरामपुर चीनी मिल द्वारा आयोजित प्रदर्शनी और सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा थे। अतिथियों ने एक वाहन पर बनाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया और पीएलए आधारित उत्पादों का निरीक्षण किया।


इंडियन प्लास्ट पैक फोरम के अध्यक्ष श्री सचिन बंसल ने बताया कि चीनी को पॉलीलैक्टिक  एसिड में कन्वर्ट कर उसे अनेक उत्पाद बनाए जा सकते है । जो कि सिंगल यूज प्लास्टिक के विकल्प है। इन उत्पादों को मिट्टी में दबा कर डिस्पोज किया जा सकता है, बिना पर्यावरण को कोई हानि पंहुचाए। उन्होंने बताया कि पीएलए आधारित उत्पाद बनाने के लिए अन्य देशों से कच्चा माल आने से महंगा होता है। इसका निर्माण देश में होने से कीमतें कम होगी और उपयोग बढेगा।


बॉय युग के केमिकल डिविजन प्रेसिडेंट श्री स्टीफन बारोट ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से पीएलए आधारित उत्पादों की उपस्थिति और पर्यावरणीय प्रभाव पर अपनी बात कही। उन्होनें बताया कि पर्यावरण से प्राप्त गन्ने से बनाने वाली चीनी को ही पीएलए को फॉर्मेट कर पॉलीलैक्टिक एसिड में बदलना और फिर उसे कटलरी, कोल्ड कप, बाटल, स्ट्रा, इयर बड, खिलौने,  फ्लैक्स बैनर, पीपीई किट और फार्मा कंटेनर भी बनाए जा सकते है। कंपनी की सुश्री श्वेता सूर्यवंशी ने बताया कि बायो युग, बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (बीसीएमएल) का एक पॉली लैक्टिक एसिड (पीएलए) निर्माण उद्यम है। यह नया उद्यम भारत के पहले औद्योगिक-स्तरीय बायो-पॉलीमर संयंत्र की स्थापना में सहायक होगा। नया पीएलए उद्यम सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। बायोप्लास्टिक पारंपरिक प्लास्टिक का एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प  है। आयोजन में बडी संख्या में उद्योगपतियों के साथ कॉलेज के छात्र, रिसर्चर और स्कॉलर्स ने भाग लिया।



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